संवाददाता : गोड्डा, झारखंड
अदाणी फाउंडेशन ने झारखंड के गोड्डा जिले में पारंपरिक आदिवासी पर्व सोहराय का आयोजन किया। सामुदायिक विकास कार्यक्रम के तहत यह उत्सव 9 से 18 जनवरी 2026 के बीच चार प्रखंडों के नौ आदिवासी गांवों में संपन्न हुआ। इसमें 1000 से अधिक आदिवासी समुदाय के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
यह आयोजन महागामा प्रखंड के गोविंदपुर एवं करनू, बोआरीजोर प्रखंड के जिरली एवं गोराडीह, ठाकुरगंगटी प्रखंड के बहादुरचक तथा गोड्डा प्रखंड के रानीडीह, गंगटा, नायाबाद एवं पेटबी संथाली गांवों में किया गया। इन आयोजनों ने आदिवासी संस्कृति की समृद्ध विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
सोहराय आदिवासी समाज का एक प्रमुख त्योहार है, जो कृषि, पशुधन और प्रकृति पूजा से गहराई से जुड़ा है। यह पर्व अच्छी फसल, पशुओं की समृद्धि और प्राकृतिक संतुलन के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। यह मानव, पशु और पर्यावरण के बीच गहरे संबंध को भी दर्शाता है।
पर्व के दौरान गांवों के घरों की साफ-सफाई कर उन्हें पारंपरिक सोहराय भित्ति चित्रों से सजाया गया। पशुधन की विधिवत पूजा कर उनके प्रति सम्मान और आभार व्यक्त किया गया। समुदाय द्वारा सामूहिक रूप से समृद्धि, स्वास्थ्य और आपसी सौहार्द के लिए प्रार्थनाएं की गईं।
उत्सव में ग्रामीणों ने पारंपरिक परिधानों में समूह बनाकर मनमोहक लोक नृत्य और गीत प्रस्तुत किए। मांदर, ढोल, नगाड़ा और बांसुरी जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर धुन पर पुरुषों एवं महिलाओं ने नृत्य किया। इन प्रस्तुतियों में शिकार, खेती-बाड़ी, ऋतु परिवर्तन और आदिवासी सामाजिक जीवन के विविध दृश्य प्रभावशाली ढंग से उकेरे गए।
इस आयोजन के माध्यम से अदाणी फाउंडेशन ने आदिवासी संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। फाउंडेशन ने भाईचारे, एकता और प्रकृति संरक्षण जैसे सोहराय पर्व की मूल भावनाओं को भी प्रोत्साहित किया।
ग्रामीणों ने इस सांस्कृतिक आयोजन को सफल बनाने के लिए अदाणी फाउंडेशन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों से सामुदायिक एकजुटता मजबूत होती है और नई पीढ़ी में अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति गर्व की भावना उत्पन्न होती है।


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